लोग कहते है के मुझे तनहाई पसंद है………..
उन्हें क्या पता, के जब तनहा होता हुं तो तुम्हारे साथ होता हुं।
खुलीं आंखोंसे वो सब देख पाता हूं , जो मैं देखना नही चाहता
जैसे ही आंखें बंद करता हु, तुम दिखाई देती हो ।
इन फूलों की खुशबुओं को क्या हुआ है आजकल? हर एक तुम जैसा महक रहा है।
ये बारिश की बूंदे… जैसे तुम्हारे पैरों की आहट।
और वो बेशर्म झरने, बह रहें हैं चुरा कर , तुम्हारे खुलकर हंसने का अंदाज़। हर तरफ बस तुम ही तुम ।
पहले तुम होकर भी नहीं होती थी और अब न होकर भी होती हो।
“मैं खुश हु तुम्हारे बगैर” ये कहकर चली गई तुम। तबसे मैं भी खुश रहने लगा हु। आख़िर तुम्हारी खुशी की वजह जो बन गया हु। पहले तुमसे सामना हुआ करता था, अब मिलना होता है ।
तुमसे ही घिरा रहता हु।
मुझे मेरी अब जरा भी फ़िक्र नहीं..।
अब अकेला नहीं हु मै! बस …..थोडासा तनहा रहता हु….।
और लोग कहते है के मुझे तनहाई पसंद है😊……. उन्हें क्या पता, के जब तनहा होता हुं तो तुम्हारे साथ होता हुं।
जब तुम पानीसी होती हो, मैं झरने सा बहता हु
जब तुम हवाओं सी होती हो, मैं ख़ुशबू सा महकता हु
तुम ये मत समझना के तुमसे दूर हो गया हूं मैं
दूर रहकर तुम्हे पाना सीख लिया है मैंने…ठीक उसी तरह जैसे कोई ऊँट बसर करता है अपनी ज़िंदगी रेगिस्तान में,अपने अंदर ढ़ेर सारा पानी समाकर ।
हम साथ रहते नही तो क्या हुआ? वैसे भी साथ रहनेका मतलब साथ होना कहाँ होता है। अक्सर।
