तलब

दीदार होता है तो तुम्हें होठों से लगा लेता हूं । मीठी भी हो और करारी भी । अपनी गरमाहट का एहसास दिलाकर जब समाती हो मुझमें, तो दिल एक पल अज़ब मचलता है, तो दूसरे ही पल ग़ज़ब की राहत पाता है । किसी दिन तो इतनी Hot लगती हो कि सिर्फ़ हाथों से थामकर, तुम्हें पास लेकर, बस देखने से ही तुम्हारा लुत्फ़ आता है। लिबास चाहे शफ़ाफ़ कांच का हो या शफ़ाफ़ियत से आरी मिट्टी का, न तुम्हारी ख़ूबसूरती कम होती है, न तुम्हारी अपनीयत।
क्यों जताती हो इतना अपनापन? आख़िर हो तो तुम सिर्फ़ एक ‘चाय‘ ।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *