हम दोनों

एक रिश्ता है हमारा..हम दोनों का.. सिर्फ हम दोनों का।
इस रिश्ते के कई नाम हो सकते है। ये कोई एक रिश्ता नहीं। पर इस रिश्ते को मै नाम नहीं देना चाहता। क्योंकि हर रिश्ता अपने नाम के साथ जिम्मेदारियां, उम्मीदें लेके आता है। कुछ मांगने लगता है। तो क्यों न एक बेनाम पर अनोखा रिश्ता ऐसा हो जो ख़ास हो। जिसमें हर रिश्ता समाता हो पर जिसमें न कोई उम्मीद हो न बंदिशें और ना आज़माइशें। एक मुनफ़रिद रिश्ता।
मेरा और तुम्हारा रिश्ता कुछ ऐसा ही है। दूर रहते हुए भी पास होने का एहसास, एक दूसरे से हमेशा जुड़े रहने का एहसास। कभी कभार जो थोड़ी अनबन होती है, वो भी तो जायज़ है.., वो अलामत है रिश्ता जिंदा होने की।
पर हम ये भी जानते है कि हम दोनों में कोई तीसरा नहीं जो हम में सुलह करें। ऐसा कोई हमदम या अनिस जो ये चाहे कि हमारा रिश्ता हमेशा बरक़रार रहे। तो कभी हांथ छूट भी जाए तो मैं अपना हाथ बढ़ाऊंगा तुम्हारी ओर, तुम बस थाम लेना।
याद रखना ये रिश्ता सिर्फ और सिर्फ हम दोनों का है।

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