September 2026

तनहाई

लोग कहते है के मुझे तनहाई पसंद है………..उन्हें क्या पता, के जब तनहा होता हुं तो तुम्हारे साथ होता हुं।खुलीं आंखोंसे वो सब देख पाता हूं , जो मैं देखना नही चाहता जैसे ही आंखें बंद करता हु, तुम दिखाई देती हो ।इन फूलों की खुशबुओं को क्या हुआ है आजकल? हर एक तुम जैसा …

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तलब

दीदार होता है तो तुम्हें होठों से लगा लेता हूं । मीठी भी हो और करारी भी । अपनी गरमाहट का एहसास दिलाकर जब समाती हो मुझमें, तो दिल एक पल अज़ब मचलता है, तो दूसरे ही पल ग़ज़ब की राहत पाता है । किसी दिन तो इतनी Hot लगती हो कि सिर्फ़ हाथों से …

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मै

मै तो मै हु वो नहीं और वो जो है वो मै नहीं तुझे वो चाहिए तो ठीक है कोई बात नहीं कि मै नहींमुझे इस बात से गिला नहींके तेरी जो पसंद है वो मै नहींतेरे साथ था तो मै भी ‘मै ‘ थातेरे बगैर तो मै भी ‘ मै ‘ नहींअब आईना देखता …

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हम दोनों

एक रिश्ता है हमारा..हम दोनों का.. सिर्फ हम दोनों का।इस रिश्ते के कई नाम हो सकते है। ये कोई एक रिश्ता नहीं। पर इस रिश्ते को मै नाम नहीं देना चाहता। क्योंकि हर रिश्ता अपने नाम के साथ जिम्मेदारियां, उम्मीदें लेके आता है। कुछ मांगने लगता है। तो क्यों न एक बेनाम पर अनोखा रिश्ता …

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भावना

भावना… या मला पाण्यासारख्या वाटतात. कधी बरसतात , कधी वाहतात तर कधी साचतात. अशा या त्यांच्या विविध अवस्था. बरसताना सुद्धा कधी हळुवार रिमझिम तर कधी कठोर मुसळधार. कधी अल्लड खळखळत वाहणं तर कधी धबधब्यागत बेधुंद कोसळनं. अनेक वाहिन्यांनी मनाच्या सागरात सामील होतात या भावना….आणि साचून राहतात. फुलावरील दवासारखी तरल ते उसळलेल्या लाटेसमान उग्र. भावनेचं बरसणं,वाहणं,साचणं …

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परीक्षा

अगदी शालेय जीवनातच जिच्याशी परिचय होतो आणि तेव्हा पासून च आयुष्यात नको असलेली पण जी आयुष्यभर कायम सोबत असते, ती म्हणजे परीक्षा. ती कधी आणि कशी आयुष्यात येते आणि त्याचा अविभाज्य घटक बनते, हे आपल्याला कळतच नाही. घटक चाचणी, सहामाही, वार्षिक परीक्षा.. असं काही वर्षे चालतच राहत..मग पुढे कोणत्या side ला जायचं science, commerce की …

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